ज्ञान की बाते
आदमी
सुख के समय ईर्ष्या करता हे !
दुःख के समय सुयोग ढूढ़ता हे !
आश्रय देने पर सर चढ़ जाता हे !
क्षमा करने पर दुर्बल समझता हे !
प्यार करने पर आघात करता हे !
विश्वास करने पर हानी पहुचाता हे !
उपदेश देने पर मुड़कर बेठता हे !
आदर करने पर खुशामद समझता हे !
उपकार करने पर अस्वीकार करता हे !
रोते हुए पैदा होता है , शिकायत करते हुए जीता है ,
और निराश होकर मर जाता है !
इस को आदमी कहते हे !
जीवन
·
जीवन एक चुनौती है , सामना करिये !
जीवन एक साहसिक कार्य है , हिम्मत रखिये !
जीवन एक दुःख हे, स्वीकार कीजिये !
जीवन एक दुःखान्त घटना है , सामना कीजिये !
जीवन एक कर्त्तव्य है , पूरा करिये !
जीवन एक खेल है , आराम से खेलिए !
जीवन एक रहस्य है , सुलझाइये !
जीवन एक संगीत हे , आनंद उठाइये !
जीवन एक चरम सुःख हे , स्वाद चखिए !
जीवन एक सुअवसर हे , सदुपयोग करिये !
जीवन एक सपना है , महसूस करिये !
जीवन एक यात्रा है , पूरी करिये !
जीवन एक प्रतिज्ञा है , निभाइये !
जीवन एक सौंदर्य है , पूजा करिये !
जीवन एक संघर्ष है , जारी रखिये !
जीवन एक लक्ष्य है , प्राप्त करिये !
धन
धन से शैय्या खरीदी जा सकती है नींद नहीं !
धन से पुस्तके खरीदी जा सकती है ज्ञान नहीं !
धन से भोजन खरीदा जा सकता है भूख नहीं !
धन से दवाएं खरीदी जा सकती है स्वास्थ नहीं !
धन से मकान खरीदा जा सकता है घर नहीं !
धन से विलासिता खरीदी जा सकती है सभ्यता नहीं !
धन से अमोद - प्रमोद खरीदा जा सकता है ख़ुशी नहीं !
धन से प्रसाधन सामग्री खरीदी जा सकती है सुंदरता नहीं !
धन से देवालय खरीदा जा सकता है निर्मलता नहीं !
धन से आज्ञाकारी सेवक खरीदा जा सकता है सम्मान नहीं !
धन से नौकर खरीदा जा सकता है मित्र नहीं !
धन से सामान खरीदा जा सकता है समानता नहीं !
धन से विषय सुख़ खरीदा जा सकता है प्यार नहीं !
धन से आदमी खरीदा जा सकता है विश्वास नहीं !
धन से वस्तुए खरीदी जा सकती है शांति नहीं !
धन से सामाजिक स्तिथि खरीदी जा सकती है कुलीनता नहीं !
धन से मान्यता खरीदी जा सकती है प्रतिष्ठा नहीं !
धन से पदवी खरीदी जा सकती है महानता नहीं !
धन से सेवा खरीदी जा सकती है स्वामी भक्ति नहीं !
धन से शक्ति खरीदी जा सकती है प्रभाव नहीं !
धन से इंशान खरीदा जा सकता है इन्शानियत नहीं !
घर ऐसा मत करो
आतिथ्य ही घर का वैभव है ! ऋण हो , ऐसा खर्च मत करो !
प्रेम ही घर की प्रतिष्ठा है ! पाप हो , ऐसी कमाई मत करो !
व्यवस्था ही घर की शोभा है ! क्लेश हो , ऐसा मत बोलो !
समाधान ही घर का सुख है ! चिंता हो , ऐसा जीवन मत जिओ !
सदाचार ही घर का सुवास है ! रोग हो , ऐसा मत खाओ !
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